Thursday, March 9, 2023

तुरकौली गांव में वरदानी के घर बनी लिट्टी खाकर मिर्गी रोग का होता है इलाज।

वरदानी के घर मिर्गी रोग की दवा हुई वितरित,उत्तर प्रदेश ही नहीं बल्कि बिहार व झारखंड से जूटे।

होलिका दहन के बाद वरदानी के घर मिर्गी की दवा लेने हजारों की जूटी भीड़।

तुरकौली गांव में वरदानी के घर बनी लिट्टी खाकर मिर्गी रोग का होता है इलाज।

प्रतिवर्ष की भांति गांव में प्रशासन रहा मुस्तैद।

(मनोज चतुर्वेदी समाचार आजमगढ़ लाइव)
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आजमगढ़।
सगड़ी तहसील क्षेत्र के तुरकौली झंझवा गांव में होलिका दहन के दिन वरदानी के घर मिर्गी के इलाज के लिए आजमगढ़ ही नहीं उत्तर प्रदेश बिहार झारखंड से जूटे सैकड़ों लोग, गांव में प्रतिवर्ष की भांति प्रशासन रहा मुस्तैद।कहते हैं कि होली का सम्मत जलते ही बहुत से दुखों का अंत हो जाता है। लेकिन होली के सम्मत में बनी लिट्टी खाने से मिर्गी और फरका जैसी बीमारी ठीक होती है, ऐसा पहली बार देखने को मिला है। जब होली के दिन लोग अपने गांव में रखे सम्मत को जलाते हैं तब सगड़ी तहसील क्षेत्र के तुरकौली गांव में मिर्गी और फरका रोग से पीड़ित लोगों का जमावड़ा हुआ। तुरकौली गांव निवासी रामप्रवेश चौहान पुत्र पतिराज चौहान पुत्रगण स्व. मेड़ही चौहान होलिका दहन की रात्रि मिर्गी व फरका के इलाज के लिए मरीजों को लिट्टी खिलाते हैं। लोगों का मानना है कि तीन से पांच वर्ष तक लगातार लिट्टी खाने से यह रोग जड़ से समाप्त हो जाता है। होलिका दहन के दिन दोपहर से ही गांव में लोगों की भीड़ लगनी शुरू हो जाती है। लिट्टी खाने के लिए बिहार, झारखंड, मध्यप्रदेश के साथ ही उत्तर प्रदेश के विभिन्न जनपदों से लोग यहां पहुंचे। लोगों का कहना है कि सैकड़ों वर्षों से यह परंपरा चली आ रही है। पहले रामपलट चौहान व पतिराज चौहान के पिता मेड़ही चौहान लिट्टी के तौर पर दवा खिलाते थे। उनकी मृत्यु के बाद उनके पुत्र रामपलट और पतिराज लोगों को दवा खिलाते थे। अब रामप्रवेश चौहान परंपरा को निभाते हैं होलिका दहन के बाद जब लोग अपने घरों को चले जाते हैं और होलिका दहन का स्थान सूना हो जाता है। तब ये लोग वहां पर सम्मत की आग में लिट्टी बनाते हैं। लिट्टी बनाते समय उस स्थान पर वहां कोई नहीं रहता है। रामप्रवेश चौहान ने बताया कि उनके बाबा मेघई चौहान को वरदान था कि होलिका दहन के दिन जौ के आटे की लिट्टी बनाकर खिलाने से मिर्गी रोग पूर्ण रूप से अच्छा हो जाता है। जिसकी परंपरा आज भी उनके वंशज जिंदा रखे हुए हैं वही उनके घर पर गांव में दूरदराज से हज़ारों की संख्या लोग जुटे रहे। लिट्टी बनाने के बाद वह लोग पूरे गांव में घूम-घूमकर लिट्टी के छोटे-छोटे टुकड़े कर लोगों में बांटते हैं। गीता, प्रकाश, मुनियां, दीपक, दुलारी आदि का कहना है कि पूर्व वर्ष से वह लोग दवा खाने आ रहे हैं और उन्हें लिट्टी खाने से बहुत फायदा हुआ है। मान्यता है कि दवा खाने के बाद मरीज को गांव का सीवान छोड़ देना होता है। वही जीयनपुर कोतवाल यादवेंद्र पांडेय ने बताया कि गांव में प्रति वर्ष की भांति इस वर्ष भी पुलिस के जवानों को तैनात किया गया था।

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