तिरंगे में लिपटा शहीद का पार्थिव शरीर पहुंचा घर मंचा कोहराम।
12 जुलाई को गश्त के दौरान हृदय गति रुकने से हुए थी शहीद की मौत।
जीयनपुर कोतवाली पुलिस व असम राइफल्स के जवान राजकीय सम्मान के साथ रहे मौजूद।
आठ जवानों द्वारा मुक्तिधाम दोहरीघाट पर चार राउंड में 32 राउंड की सलामी दी।
(मनोज चतुर्वेदी ब्यूरो प्रभारी आजमगढ़)
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आजमगढ़।
सगड़ी तहसील क्षेत्र के गोपईपुर निवासी शहीद का पार्थिव शरीर बृहस्पतिवार को दिन मे 12:00 बजे असम राइफल्स के जवान तिरंगे में लिपटा लेकर घर पहुंचे जिन्हें आसपास की गांव के लोग व परिजनों ने सैकड़ों की संख्या में नम आंखों से विदाई दी।
सगड़ी नायब तहसीलदार मयंक मिश्रा व इमिलिया चौकी इंचार्ज भगत सिंह ने पहुंचकर शहीद के पार्थिव शरीर पर माल्यार्पण कर राजकीय सम्मान के साथ विदाई दी। गोपईपुर निवासी बहादुर राम पुत्र दलसिंगार राम ( 58) साल असम राइफल- 44 सेना में 15 मई वर्ष 1985 में मेडिकल क्षेत्र में फार्मासिस्ट के रूप में भर्ती हुए तब से देश की सेवा में अनवरत तैनात रहे। वर्तमान समय में तिम्मालौंग जनपद के मणिपुर में असम राइफल की टुकड़ी के साथ 12 जुलाई दिन सोमवार को 2:00 बजे हृदय गति रुकने से उनकी मौत हो गई। असम राइफल के तिरंगे में शरीर को लपेटकर उनके पार्थिव शरीर को असम राइफल के एक दर्जन जवान लेकर उनके गृह जनपद आजमगढ़ के गोपईपुर गांव में गुरुवार को सुबह 11:00 बजे पहुंचे जहां सगड़ी नायब तहसीलदार मयंक मिश्रा ने राजकीय सम्मान के साथ पुष्प चक्र अर्पित करते हए राजकीय सम्मान दिया गया।इस दौरान सैकड़ों की संख्या में स्थानीय गांव के लोग मौजूद रहे जो नम आंखों से शहीद के पार्थिव शव यात्रा में सम्मिलित हुए और भावभीनी श्रद्धांजलि दी। असम राइफल के जवान पार्थिव शरीर को लेकर उनके परिजनों के साथ दोहरीघाट मुक्तिधाम सरयू नदी के तट पर पहुंच कर अंतिम संस्कार कराया और 32 राउंड की सलामी आठ जवानों के द्वारा दी गयी। जो नायब सूबेदार जगदीज राज के नेतृत्व में किया गया। शहीद के पास दो पुत्र और दो पुत्रियां हैं पूर्व में उनकी पत्नी मंजुला की मौत सन 2015 में हो चुकी है अप्रैल माह में वे अपने पुत्र दीपक की शादी में सम्मिलित होने के लिए घर पर आए हुए थे जून में छुट्टी समाप्त होने के पश्चात पुनः अपने तैनाती स्थल पर चले गए।
अभी उनके छोटे पुत्र राहुल का विवाह नहीं हुआ है वही उनकी दो पुत्रियां रंजना,अंजू,दीपक,राहुल,का रो-रोकर बुरा हाल रहा। वही ग्राम प्रधान राजेंद्र यादव, नवनिर्वाचित जिला पंचायत सदस्य रामबृक्ष गौतम व जनार्दन राव, सहित जनप्रतिनिधि व सैकड़ों की संख्या में स्थानीय ग्रामीण पुरुष व महिलाएं रही। एव असम राइफल्स के अधिकारी ने बताया कि आठ जवान फैजाबाद से सलामी देने के लिए आये थे। वही दोहरीघाट के मुक्ति धाम में अंतिम संस्कार किया गया।
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