मऊ जनपद की एसओजी टीम ने पारनकुंडा गौशाला पर मारा छापा।
एसओजी टीम को देखकर पिकअप छोड़कर भागे पशु तस्कर।
पारनकुंडा गौशाला में पहुंचे अधिकारी सीसीटीवी कैमरा मिला बंद,लाइट भी रही बंद जांच का आदेश।
(मनोज चतुर्वेदी समाचार आजमगढ़ लाइव)
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आजमगढ़।
सगड़ी जीयनपुर कोतवाली क्षेत्र के पारनकुंडा गांव में ब्लॉक अजमतगढ़ द्वारा स्थापित गौशाला से पशुओं की तस्करी कराने के मामले का एसओजी मऊ जनपद की टीम ने शनिवार की रात में छापा मारकर पशु तस्करी का भंडाफोड़ किया है। रात में एसओजी टीम को आता देख पशु तस्कर अंधेरे का फायदा उठाते हुए पिकअप और उस पर लदे पशुओं को छोड़कर फरार हो गए। एसओजी टीम ने जीयनपुर पुलिस को सूचना दी। पिकअप पर लदे पशुओं को नीचे उतरा गया। वाहन को पुलिस थाने लेकर चली आई।सुबह मामला जिलाधिकारी आजमगढ़ के संज्ञान में आया तो उन्होंने सीडीओ परीक्षित खटाना को मौके पर जांच के लिए भेजा। सीडीओ के मौके पर पहुंचने पर हड़कंप मच गया। सीडीओ के पहुंचते ही एडीएम राहुल कुमार, मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी ओमप्रकाश आनंद,एसडीएम सगड़ी श्याम प्रताप सिंह,पुलिस क्षेत्राधिकारी अनिल कुमार वर्मा भी पहुंच गए। मुख्य विकास अधिकारी ने एक-एक बिंदुओं की जांच की और कहा कि जिम्मेदारी तय कर दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।अजमतगढ़ ब्लॉक के पारनकुंडा गांव में गौशाला बनी हुई है। जिसमें पशुओं को सुरक्षित और संरक्षित किया जाता है। लाखों रुपए से बने इस गौशाला में 86 पशुओं के रखने की क्षमता है। इस गौशाला से पशुओं की तस्करी का मामला काफी दिनों से उठ रहा था। ग्रामीणों ने इसकी कई बार शिकायत की। लगभग सात माह पूर्व इसकी जांच की गई थी। तब जांच में सब कुछ ठीक-ठाक दिखाकर रिपोर्ट जिलाधिकारी को सौंप दी गई थी।शनिवार की रात में लगभग एक बजे के करीब पशु तस्कर चार पांच पशुओं को पिकअप में भरकर ले जाने की तैयारी में थे इसी समय एसओजी मऊ की टीम ने छापा मार दिया। टीम को आते देख पशु तस्कर चारदीवारी कूदकर भाग गए। टीम के सिपाहियों ने कुछ दूर तक तस्करों को दौड़ाया लेकिन रात के अंधेरे में सभी तस्कर फरार हो गए। रात में छापेमारी के दौरान गांव के भी काफी लोग इकट्ठा हो गए। वीडियो बनाकर इंटरनेट मीडिया पर प्रसारित कर दिया। रविवार को सुबह जिलाधिकारी रविंद्र कुमार के संज्ञान में मामला आते ही उन्होंने मुख्य विकास अधिकारी को जांच के लिए भेजा। जांच के दौरान मुख्य विकास अधिकारी आजमगढ़ ने खंड विकास अधिकारी अजमतगढ़ से पूछा कि सुरक्षा के लिए लगाया गया सीसी कैमरा क्यों बंद पड़ा है,किन-किन लोगों की पशुओं की देखरेख में ड्यूटी लगाई गई है। वर्तमान समय में गौशाला में कितने पशु रखे गए हैं,दर्जनों पशुओं की टैगिंग क्यों नहीं की गई है,यदि सीसी कैमरा और लाइट खराब है उसको क्यों नहीं बनवाया गया। मुख्य विकास अधिकारी के इस प्रश्नों का सही जवाब न तो पारनकुंडा के प्रधान दे पाए नहीं ग्राम पंचायत सचिव। खंड विकास अधिकारी जरूर बचाव की मुद्रा में जवाब देते रहे। कोतवाली प्रभारी जीयनपुर राजकुमार सिंह ने बताया कि इस मामले में वाहन को जप्त कर लिया गया है और अज्ञात लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर कार्रवाई की जा रही है। वहीं क्षेत्र में तरह-तरह की चर्चाएं हो रही हैं कि इस पशु तस्करी में प्रधान व सचिव और खंड विकास अधिकारी भी मिले हुए हैं।
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