ईमानदार,बेदाग और गरीबों के मददगार सदैव याद किए जाएंगे मलिक मसूद।
लखनऊ में इलाज के दौरान हुआ निधन क्षेत्र में शोक की लहर।
कांग्रेस से शुरू की राजनीति बसपा से बने विधायक।
(मनोज चतुर्वेदी समाचार आजमगढ़ लाइव)
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आजमगढ़।
सगड़ी बहुजन समाज पार्टी की मुखिया मायावती के अत्यंत करीब रहे पूर्व विधायक और दर्जा प्राप्त राज्य मंत्री मलिक मसूद के निधन से सगड़ी के लोगों के बीच से एक बेदाग एवम् ईमानदार छवि और गरीबों की कदम दर कदम मदद करने वाला राजनीति का एक दीपक बुझ गया।मंगलवार को भोर में इलाज के दौरान लखनऊ में हुए मलिक मसूद के निधन से उनके समर्थकों सहित सभी दलों के लोगों में गहरी पीड़ा और शोक है। निधन की खबर मिलते ही उनके सगड़ी आवास पर समर्थकों और नेताओं के पहुंचने का सिलसिला शुरू हो गया। सगड़ी गांव स्थित पैतृक आवास पर उन्हें खाक ए सुपुर्द किया जाएगा। मूल रूप से व्यापारिक गतिविधियों से जुड़े मलिक मसूद ने 1980 में कांग्रेस पार्टी से सक्रिय राजनीति शुरू की। कल्पनाथ राय और पंचानन राय के सानिध्य में काफी दिनों तक कांग्रेस में काम करने के बाद 1996 के विधानसभा चुनाव में निर्दल प्रत्याशी के रूप में सगड़ी विधानसभा से चुनाव लड़ा और लगभग 10000 वोट पाए। 1996 के चुनाव के बाद बहुजन समाज पार्टी के वरिष्ठ नेता नसीमुद्दीन सिद्दीकी के संपर्क में आए और बहुजन समाज पार्टी में शामिल हो गए। अपने काम से धीरे-धीरे बसपा मुखिया मायावती के काफी करीब हो गए। 2002 के विधानसभा चुनाव में उन्हें बसपा का टिकट मिला और समाजवादी पार्टी के विधायक रामप्यारे सिंह को हराकर विधायक चुने गए। 2007 तक लगातार विधायक रहे। ईमानदार और वेदाग छवि के कारण तत्कालीन मुख्यमंत्री मायावती ने उन्हें आवास विकास निगम का उपाध्यक्ष बनाकर राज्य मंत्री का दर्जा दिया। 2007 के चुनाव में भी उन्हें बहुजन समाज पार्टी ने चुनाव लड़ने के लिए टिकट दिया लेकिन इस चुनाव में पूर्व मंत्री रामप्यारे सिंह के पुत्र सर्वेश कुमार सिंह ने उन्हें पराजित कर दिया। मलिक मसूद अपनी बेबाक टिप्पणी स्वच्छ और ईमानदार छवि के लिए सदैव जनता के बीच याद किए जाएंगे।
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