विभिन्न मांगो को लेकर उपजिलाधिकारी सगड़ी को सौंपा ज्ञापन।
निर्बल इंडियन शोषित हमारा आम दल के द्वारा गृह मंत्री के नाम सम्बोधित ज्ञापन सौंपा।
उत्तर प्रदेश की अनुसूची में समालि दर्जन भर जातियों को विमुक्ति जनजाति की सुविधाए देने की मांग।
(मनोज चतुर्वेदी ब्यूरो प्रभारी आजमगढ़)
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आजमगढ़।
सगड़ी तहसील पर सोमवार को निर्बल इंडियन शोषित हमारा आम दल निषाद पार्टी द्वारा विभिन्न मांगों के समर्थन में गृह मंत्री भारत सरकार को उपजिलाधिकारी सगड़ी के माध्यम से संबोधित ज्ञापन सौंपते हुए विभिन्न मांगों के समर्थन में मांग की गई कि मछुआ समुदाय के तमाम पर्यायवाची जातियों को अनुसूचित जनजाति का दर्जा देते हुए विमुक्ति जाति घोषित किया जाए। जो उत्तर प्रदेश सरकार की संविधान की अनुसूचित जाति की सूची में क्रम संख्या 18,36,53,66 आदि पर विभिन्न मछुआ समुदाय की जातियां दर्ज की गई है। जिसमें मझवार केवट मल्लाह,राजगोंड़ पर्यायवाची एवं जेनेरिक वंशज के रूप में मझवार दर्शाया एवं परिभाषित किया गया है। जिन्हें देश की आजादी के बाद आज तक शासन की दृष्टि नहीं पड़ी है। उपरोक्त पर्यायवाची जातियां संवैधानिक रूप से मजबूर हैं। यह विधिक रुप से सिद्ध करने के लिए पर्याप्त है कि मझवार माझी केवट मल्लाह परस्पर पर्यायवाची समानार्थी शब्द है। ज्ञापन के माध्यम से मांग की गई कि इन समस्त सूचियों में वर्णित जातियों को विमुक्ति जाति का दर्जा देते हुए इनके उत्थान के लिए प्रयास किया जाए। मछुआ समुदाय हमेशा से ठगा जाता रहा है और आजादी से लेकर अब तक दर्जनों जातियां ऐसी हैं जिनकी उत्थान के लिए सरकार ने कभी कोई प्रयास नहीं किया और वह दबी कुचली गरीबी की हालत में जीवन जीने को विवश है। ऐसी जातियों को उत्थान के लिए प्रदेश से लेकर केंद्र की सरकार को अमल में लाना चाहिए अन्यथा जिस दिन यह जातियां भाजपा की तरफ जो बटन दबाती चली आ रही है वह जब बटन दबाना बंद कर देंगे तो सत्ता से बाहर होने में तनिक भी देर नहीं लगेगी। इस संबंध में निषाद पार्टी के राष्ट्रीय डॉ संजय कुमार निषाद ने कहां की जिस तरह से यह जातियां पहले सपा और कांग्रेसी बसपा को जिताने के लिए जी जान लगा देती थी वह बीजेपी के आश्वासन पर टिकी हुई है पर अब वह दिन दूर नहीं जब बीजेपी भी इन्हें अछूता मानने लगेगी तो यह लोग भी अन्य बातों पर विचार करने लगेंगे और उस दिन सरकार को भी सोचना होगा। मछुआ समुदाय की संख्या काफी अधिक है और प्रत्येक जनपद व तहसीलों में इनकी अच्छी खासी तादाद पाई जाती है। जिस दिन यह बटन दबाना बंद कर देंगे उस दिन भाजपा सरकार को सत्ता से बाहर होने में देर नहीं लगेगी। हमें संगठित होकर कार्य करना चाहिए जिससे समाज का लाभ हो सके। हम सबको मिलकर संगठन को मजबूत करने की जरूरत है। उन्होंने गृह मंत्री को संबोधित 16 बिंदुओं से संबंधित ज्ञापन सौंपकर मांग की है कि ऐसी जातियों को विमुक्ति जाति की सुविधा देते हुए इनके उत्थान के लिए सरकार को आगे आना चाहिए जिससे इन की दीन दशा बदल सके। उन्होंने यह भी मांग की कि उपरोक्त सभी समूह की पर्यायवाची उप जातियों को रेणुका आयोग की रिपोर्ट के अनुसार विमुक्ति जनजाति की सुविधा दी जाए। राष्ट्रपति के 1961 के आदेशानुसार मछुआरों को उपरोक्त जातियों में 2021 की जनगणना में भी गीना जाए। तालाब घाट नदी पूर्व की भाती निषाद वंशीय मछुआ समुदाय को दिया जाए। मत्स्य मंत्रालय के सभी योजनाओं का लाभ परंपरागत गरीब मछुआरों को दिया जाए। पंचायत चुनाव से पहले बसपा द्वारा किए गए मझवार आरक्षण जो संविधान की सूची में सूचीबद्ध है रोक हाईकोर्ट से लगी है उसे सरकार हाईकोर्ट से पक्ष में प्रमाणिक दस्तावेज प्रस्तुत कर हटाया जाए। मत्स्य मंत्रालय के विभागों को ब्लॉक स्तर पर खोला जाए। जनसंख्या के आधार पर सभी क्षेत्रों में मछुआ समुदाय के सभी जातियों तथा उप जातियों के लिए सीट आरक्षित की जाए। प्रयागराज में श्री रामचंद्र जी की मूर्ति का नाम तथा राम के बड़े भाई निषादराज की मूर्ति अयोध्या में श्री रामचंद्र की मूर्ति के बराबर लगाई जाए।मछुआ समुदाय के सभी मछुआरों का जीवन वृतांत विस्तार से पाठ्यक्रम में शामिल किया जाए ताकि उनके इतिहास को पुनर्जीवित किया जा सके।
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