Friday, September 13, 2024

बाढ़ खंड के अधिशासी अभियंता के साथ विधायक ने किया कटान स्थल का निरीक्षण।

घाघरा नदी में दो‌ बार में छोड़ा गया 7,60,564 क्यूसेक पानी।

खतरा निशान से 92 सेमी नीचे पहुंचा नदी का जलस्तर।

सहबदिया गांव में जारी रही कटान।

बाढ़ खंड के अधिशासी अभियंता के साथ विधायक ने किया कटान स्थल का निरीक्षण।

ग्रामीणों ने उठाई कटान रोकने‌ की मांग,अधिकारी ने प्रोजेक्ट के लिए मांगी जमीन।
 
(मनोज चतुर्वेदी समाचार आजमगढ़ लाइव)
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आजमगढ़।
सगड़ी तहसील क्षेत्र के उत्तर दिशा में बहने वाली घाघरा नदी के जलस्तर में लगातार कमी से एक ओर जहां ग्रामीणों ने राहत की सांस ली है। वहीं पहली बार एक दिन में दो बार करके 7,60,564 क्यूसेक पानी छोड़े जाने से ग्रामीणों की चिंता एक बार फिर बढ़ने लगी है। सुबह 3,24,439 तो शाम चार बजे 4,36,125 क्यूसेक पानी छोड़ा गया। चार गांवों में कटान तो थम गई, लेकिन सहबदिया में  कटान हो रही है। गुरुवार की अपेक्षा शुक्रवार को जलस्तर में 23 सेमी की कमी रिकार्ड की गई। मुख्य गेज स्थल बदरहुआ नाले के पास खतरा निशान 71.68 मीटर है। जबकि शुक्रवार को यहां का जलस्तर 70.76 मीटर रहा। यहां पर गुरुवार को 70.99 मीटर रिकार्ड किया गया था। कई दिनों से जलस्तर में कमी के बाद भी 67वें दिन तीन बैराजों गिरिजा बैराज, शारदा बैराज व सरयू बैराज से पानी छोड़े जाने से खतरा बरकरार है।जलस्तर में कमी के के साथ झगरहवा,बगहवा,बासू का पुरा, परसिया में कटान पहले ही रुक गई थी। जबकि सहबदिया में शुक्रवार को भी कटान जारी रही। इस बीच क्षेत्रीय विधायक डॉ एच एन पटेल ने बाढ़ खंड के अधिशासी अभियंता अरुण सचदेवा के साथ कटान स्थल का निरीक्षण किया। मौके पर पहुंचे ग्रामीणों ने कटानरोधी उपाय करने की मांग उठाई। जिस पर प्रोजेक्ट बनाने के लिए अभियंता ने ग्रामीणों ने जमीन का अनापत्ति प्रमाण पत्र देने की बात कही। सगड़ी विधायक डॉ0 एच. एन सिंह पटेल ने कहा कि किसान जमीन का अनापत्ति प्रमाण पत्र देने के लिए तैयार है। विधिक कार्यवाही पूरी करते हुए कटान को रोकने के लिए जल्द से जल्द प्रोजेक्ट पर काम शुरू किया जाए।सितंबर महीने के अंत तक जलस्तर में उतार-चढ़ाव के कारण भी ग्रामीणों की चिंता बनी हुई है। राहत की बात यह भी कि जलस्तर कम होने से आवागमन की समस्या समाप्त हो गई है। दूसरी ओर प्रशासन बाढ़ के आसन्न संकट को देखते हुए अलर्ट दिख रहा है। बचाव व राहत कार्य के लिए प्रशासन द्वारा 10 बाढ़ चौकियों की स्थापना के साथ 14 स्थानों को राहत शिविर के लिए चयनित किया जा चुका है।

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