Wednesday, July 14, 2021

कानून तोड़ने और हाथ में लेने का किसी को हक नहीं --आयोग

कानून तोड़ने और हाथ में लेने का किसी को हक नहीं --आयोग

पलिया गांव की घटना अत्यंत निंदनीय महिलाओं के साथ हुई घटना अशोभनीय।

 जांच के बाद दोषियों को अवश्य मिलेगी सजा।

शासन को सौंपी जाएगी पूरी रिपोर्ट।

(मनोज चतुर्वेदी ब्यूरो प्रभारी आजमगढ़)
हर खबर पर नजर सच है तो दिखेगी।

आजमगढ़।
सगड़ी रौनापार थाना क्षेत्र के पलिया गांव में 29 जून को घटित घटना की जांच करने के लिए उत्तर प्रदेश अनुसूचित जाति जनजाति आयोग के उपाध्यक्ष रामनरेश पासवान के नेतृत्व में गठित 6 सदस्य कमेटी बुधवार को देर शाम गांव में पहुंची। स्वजनों से घटना के बारे में विस्तृत जानकारी ली। आयोग की पूरी टीम लगभग डेढ़ घंटे तक गांव में की गई तोड़फोड़ नष्ट किए गए सामानों की जांच किया और परिवार से मिला।
आयोग के उपाध्यक्ष राम नरेश पासवान ने कहा कि पलिया की घटना अत्यंत निंदनीय है। परिवार के सभी सदस्यों से घटना के संबंध में पूरी जानकारी ली गई है। इसकी रिपोर्ट शासन को प्रेषित की जाएगी।
 जांच के बाद दोषियों को हर हाल में सजा मिलेगी।
 किसी को भी कानून हाथ में लेने का हक नहीं है।
 इस संबंध में डीएम और एसपी आजमगढ़ द्वारा भी रिपोर्ट दी गई है। जिसका अवलोकन किया जाएगा। पूरे तथ्यों से शासन को अवगत कराया जाएगा। अनुसूचित जाति जनजाति की सदस्य अनीता सिद्धार्थ ने कहा कि पलिया में महिलाओं के साथ जिस तरह का व्यवहार किया गया है वह कतई उचित नहीं है। दोषियों को शीघ्र ही दंडित किया जाएगा।
रौनापार थाना क्षेत्र के पलिया गांव में 29 जून को लड़की के विवाद को लेकर दो पक्षों में मारपीट हो गई थी। जिसका बीच-बचाव करने गई रौनापार पुलिस के दो सिपाहियों विवेक त्रिपाठी और मुखराम यादव को ग्रामीणों ने मारपीट कर घायल दिया था। आरोपित है कि इससे नाराज पुलिस के लोगों ने गांव में रात्रि मे 9:00 बजे पहुंचकर तीन जेसीबी से 4 लोगों के मकान क्षतिग्रस्त कर दिया था और घर मे बने मंदिर तक को तोड़ दिया और मकान में रखे सामान भी पूरी तरह से तहस-नहस कर दिया था। एवम् घर पर बाइक एक ट्रैक्टर आदि को भी क्षतिग्रस्त कर दिया गया।
 इसको लेकर महिलाएं 2 जुलाई से गांव में ही धरने पर बैठ गई। अनुसूचित समाज के लोगों पर हुए अन्याय की खबर मिलते ही राजनीतिक दलों के लोग सक्रिय हो गए। कांग्रेस की प्रदेश प्रभारी प्रियंका गांधी, बहुजन समाज पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती और समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव की ट्वीट के बाद यह मामला पूरी तरह से गरमा गया। प्रशासन सकते में आ गया। बढ़ते राजनीतिक दबाव के बीच जिला प्रशासन ने पीड़ितों की सारी मांगे मांगते हुए 10 जुलाई को भाजपा नेता मनीष मिश्रा और जयनाथ सिंह की पहल पर धरना खत्म हुआ था। लेकिन परिवार और ग्रामीणों की मांग अनवरत जारी रही।
 इसी क्रम में बुधवार को अनुसूचित जाति जनजाति आयोग के उत्तर प्रदेश उपाध्यक्ष राम नरेश पासवान की अध्यक्षता में गठित टीम के सदस्य कमलेश पासी,शेषनाथ आचार्य,तीजाराम, अनीता सिद्धार्थ और मनोज सोनकर पलिया गांव पहुंचे और पीड़ित परिवार की सुनीता देवी, अनीता देवी, स्वतंत्र कुमार, मुन्ना पासवान,पूनम देवी,प्रभावती,मिंटू,पिंकू,मंजू, प्रियंका,चंपा,संध्या से मिलकर 29 जून को हुए उत्पीड़न के बाबत विस्तृत जानकारी प्राप्त की।वही परिवार ने कहा कि यदि 18 तक न्याय नही मिला और मुकदमा वापस नही लिया गया तो पुनः 19 जुलाई से हम सब धरने पर बैठ जायेगे।आजाद समाज पार्टी के नेता एहसान खान ने कहा कि 19 को चंद्रशेखर रावण आएंगे और परिवार के साथ हुई पुलिस कार्यवाही पर परिवार की सहमति से आगे की रणनीति तय करेंगे।

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