घटने लगा घाघरा का जलस्तर समस्या बरकरार।
घटते जलस्तर के बीच लोग पानी से होकर कर रहे आवागमन।
लोगों को आवागमन के लिए चलाई जा रही 51 नाव,
जलस्तर 33 सेमी घटा पर अभी खतरा निशान से 47 सेमी पार।
51वें दिन भी तीन बैराजों से 2,2 5,810 पानी हुआ डिस्चार्ज
(मनोज चतुर्वेदी समाचार आजमगढ़ लाइव)
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आजमगढ़।
सगड़ी तहसील के उत्तरी छोर पर बहने वाली घाघरा नदी के जलस्तर में कमी दर्ज की जा रही है। लेकिन अभी भी घाघरा नदी खतरा बिंदु से ऊपर बह रही है। घटते जलस्तर को देखते हुए 61 नांव की जगह 51नांव कर दी गई है। ग्रामीणों की समस्याएं अभी बरकरार है। बाढ़ प्रभावित कुछ क्षेत्रों में पानी का जलस्तर कम होने से नांव का संचालन नहीं हो पा रहा है जिससे लोग रोजमर्रा के सामानों की खरीदारी के लिए पानी से होकर आवागमन कर रहे हैं बाजार से होकर सामानों को लेकर पैदल सामानों के साथ घर जा रहे है। अभी भी 17 गांव के रास्ते पानी से डूबे हुए हैं। खेतों में पानी होने के कारण हरे चारे की समस्या उत्पन्न हो गई है पशु सड़ा गला चारा खाने के लिए मजबूर हैं। ग्रामीण महुला गढ़वल बंधे के दक्षिण से अभी भी 5 से 6 किलोमीटर की दूरी तय करके पशुओं के लिए हरा चारा लेकर घर को जा रहे हैं। हरैया विकास खंड के 20 विद्यालय अभी भी बंद है। जिसमें 6 विद्यालयों में परिसर में पानी भरा हुआ है 14 विद्यालय बाढ़ के पानी से गिरे हुए हैं। घाघरा नदी बुधवार में घटाव दर्ज किया गया, तो जलस्तर में 33सेमी की कमी दर्ज की गई। लेकिन नदी अभी खतरा निशान से 47सेमी ऊपर बह रही है।वैसे तीन महीने जलस्तर में उतार -चढ़ाव के कारण प्रशासन अलर्ट है और तहसील प्रशासन की ओर से हर पल नजर रखी जा रही है। बुधवार को 33सेमी घटाव के बाद मुख्य माप स्थल बदरहुआ नाले के पास खतरा निशान 71.68 मीटर से 47 सेमी ऊपर यानी 72.15मीटर पर नदी बह रही है। मंगलवार को जलस्तर 72.48 मीटर रिकार्ड किया गया था। अभी भी 17 गांवों की 14 हजार आबादी के लिए नांव ही आवागमन का सहारा बना हुआ है। हालात को देखते हुए। आपात स्थिति से निपटने के लिए पीएसी की फ्लड कंपनी तैनात कर दी गई है। नाव की संख्या 61से घटाकर 51 की जा चुकी है। देवारा खास राजा ग्रामसभा के झगरहवा का पुरवा, कोमल का पुरवा, बासू का पुरवा, बगहवा का पुरवा, चक्की हाजीपुर, लाला का पुरवा, पालकी का पुरवा, बांका, बूढ़नपट्टी, सोनौरा, अजगरा मगर्बी, अभ्भन पट्टी, भदौरा, शाहडीह सहित 17 गांव बाढ़ के पानी से घिर गए हैं। इस बीच 51वें दिन भी तीन बैराजों से छोड़े गए 2,25,810 क्यूसेक पानी से बाढ़ का खतरा बरकरार है।
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