हरिशंकर परसाई का मना जन्म शताब्दी समारोह।
रामानंद सरस्वती पुस्तकालय जोकहरा में आयोजित हुआ राष्ट्रीय संगोष्ठी।
बीसवीं शताब्दी के प्रतिनिधि लेखक हैं हरिशंकर परसाई:डा0 आशीष त्रिपाठी।
(मनोज चतुर्वेदी समाचार आजमगढ़ लाइव)
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आजमगढ़।
सगड़ी तहसील क्षेत्र के श्रीरामानंद सरस्वती पुस्तकालय जोकहरा में प्रगतिशील लेखक संघ ने मनाया हरिशंकर परसाई का जन्म शताब्दी समारोह आयोजित हुई राष्ट्रीय संगोष्ठी 20वीं शताब्दी के प्रतिनिधि लेखक हैं हरिशंकर परसाई काशी हिंदू विश्वविद्यालय के प्रख्यात साहित्यकार डॉ0 आशीष त्रिपाठी। श्रीरामानंद सरस्वती पुस्तकालय जोकहरा में प्रगतिशील लेखक संघ आजमगढ़ व श्रीरामानंद सरस्वती पुस्तकालय जोकहरा के संयुक्त तत्वाधान में बुधवार को“स्मरण - हरिशंकर परसाई” विषयक राष्ट्रीय संगोष्ठी महात्मा गांधी अंतर्राष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति व प्रख्यात साहित्यकार विभूति नारायण राय की अध्यक्षता में प्रारंभ हुई। प्रमुख रूप से विभूति नारायण राय,डा0 आशीष त्रिपाठी,प्रियदर्शन मालवीय,रघुवंशमणि,संध्या निवेदिता, मनोज सिंह,बसंत त्रिपाठी,गार्गी प्रकाशन के सम्पादक,लेखक,अनुवादक दिगम्बर ने संयुक्त रूप से अपने स्वागत वक्तव्य में डा0 राजाराम सिंह ने कहा कि साहित्य समाज को दिशा देता है। उन्होने हरिशंकर परसाई की जन्मशती स्मरण पर आयोजित राष्ट्रीय संगोष्ठी में उपस्थित साहित्यकारों का स्वागत किया। संगोष्ठी के पहले सत्र का विषय “विकलांग श्रद्धा का दौर“ था जिस पर प्रमुख वक्ता के रूप में बोलेते हुये काशी हिंदु विश्वविद्यालय के प्रोफेसर डा0 आशीष त्रिपाठी ने कहा कि आजादी के बाद हरिशंकर परसाई जी को बीसवीं शताब्दी का प्रतिनिधि लेखक कहा जा सकता है। अपने व्याख्यान में डा0 त्रिपाठी ने हरिशंकर परसाई की व्यंग्य रचनाओं का उल्लेख करते हुये हरिशंकर परसाई जी को आजादी के बाद व्यंग्य लिखने की आवश्यकता ही क्यों पड़ी ? क्योंकि समाज विद्रुप हुआ जा रहा था।आडम्बर का बोलबाला हो चला था। महाविद्यालय में महाविद्यालय नही, विश्वविद्यालय में विश्वविद्यालय नही, पुस्तकालय में पढ़ने वाला नही, उसी तरह लोकतंत्र में लोकतंत्र नही तो ऐसे समय में हरिशंकर जी व्यंग्य को अपना हथियार बनाते हैं। डा. त्रिपाठी ने कहा कि हरिशंकर परसाई नब्बे के दशक में लिखते हैं कि विकलांग श्रद्धाओं से आवारा भीड़ पैदा होती है। ये वो भीड़ है जो हिटलर पैदा करती है। हरिशंकर परसाई जन्मशती पर उनके निबंधों व रचनाओं को कोट करते हुये डा0 आशीष त्रिपाठी ने कहा कि हरिशंकर परसाई को 20वीं शदी का प्रतिनिधि लेखक बताया। सत्र को प्रियदर्शन मालवीय, रघुवंशमणि, फिदा हुसैन,मनोज सिंह, बसंत त्रिपाठी, ने प्रमुख रूप से संबोधित किया संचालन डा. हसीन खान द्वारा किया गया। राष्ट्रीय संगोष्ठी के दूसरे सत्र में “ठिठुरता हुआ गणतंत्र“ विषय पर मुख्य वक्ता के रूप में सम्बोधित करते हुये जबलपुर से आये हुये राजीव कुमार शुक्ल जी ने हरिशंकर परसाई जी के कई अंतरंग पहलुओं से अवगत कराया तथा उनके साहित्य की गूढ़ चर्चा की। इस सत्र की अध्यक्षता साहित्यकार गया सिंह ने व संचालन संध्या निवेकिदता ने किया। इस दौरान देश के अलग -अलग स्थान से दर्जनों की संख्या में प्रसिद्ध साहित्यकार व लेखक सम्मिलित हुए।
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