हम न्याय दिलाने के लिए आये है धरना देने नही-गया चरन दिनकर
जिलाधिकारी और कप्तान को एससी एसटी का एक्ट का बोध नहीं ऐसे लोक सेवक को रहने का हक नहीं।
जो मुख्यमंत्री अपराधियों को दंड न दे सके और चुनी हुई सरकार का सही से निर्वहन न कर सके वह मेरे निगाह में दो कौड़ी का मुख्यमंत्री है: गया चरन दिनकर
(मनोज चतुर्वेदी ब्यूरो प्रभारी आजमगढ़)
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आजमगढ़।
सगड़ी रौनापार थाना क्षेत्र के पलिया गांव में पांचवें दिन महिलाओं द्वारा पुलिस उत्पीड़न के खिलाफ दिए जा रहे धरने में बसपा प्रतिनिधिमंडल के गया चरन दिनकर गांव में पहुंचकर पीड़ित परिवारों से मिलकर उन्हें न्याय का भरोसा देते हुए मामला सदन में उठाने और जब तक पुलिस प्रशासन एव दोषियों पर कार्यवाही नहीं हो जाती तब तक हम लोग चुप नहीं बैठेंगे। दलितों के साथ जिस तरह से योगी सरकार द्वारा उत्पीड़न किया जा रहा है इसे दलित समाज कतई बर्दाश्त नहीं करेगा। गया चरन दिनकर ने कई गम्भीर आरोप लगाते हुए कहा कि अब तक प्रशासन को 24 घंटे के अंदर इतनी बड़ी घटना की रिपोर्ट शासन को दे देनी चाहिए थी। जिस कप्तान और डीएम को अपने दायित्वों का बोध नहीं हो उसे सेवा में रहने का कोई हक नहीं है इसके लिए हम काम करेंगे 29 की घटना होती है और पुलिस जीन अपराधियों को पकड़ कर जेल के अंदर डालना चाहिए उन्हें ऐसे कृतियों में बचाते हुए स्वयं इस पीड़ित परिवार को मुखिया को मारती पिटती है पुलिस को जितना गलत करना चाहिए था उतना पुलिस के लोगों ने किया मकान तोड़ दिया गया अनाज में पानी डाल दिया गया सब बर्बाद कर दिया और सारी माननीय मर्यादा को खुलेआम उल्लंघन किया गया। महिलाओं के साथ अभद्रता और छेड़छाड़ की गई जिस तरह से जेसीबी लाकर मकानों को गिराया गया जो भी दस्तावेज थे वह फाड़ दिए गए इलेक्ट्रॉनिक सामानों की क्षति की गई ट्रैक्टर आदि को जेसीबी से तोड़ दिया गया। उत्तर प्रदेश में हमने इस तरह की अब तक कोई घटना नहीं देखी है। जो बहुत बड़े अपराधी है उनके खिलाफ तमाम नरसंहार जैसे मुकदमे कायम है ऐसे अपराधियों के साथ भी ऐसी और माननीय घटनाएं नहीं की जाती है। क्योंकि अनुसूचित जाति के लोग हैं और यह सरकार की निगाह में उत्तर प्रदेश के निवासी नहीं है और नही इंसान है। इस जिले के जिलाधिकारी और कप्तान को एससी एसटी एक्ट की धारा 6 8 9 10 का बोध नहीं है इस एक्ट के तहत चाहे वह अपराधी हो या कर्मचारी हो या लोकसवक हो या अधिकारियों ऐसे लोगों के खिलाफ सुसंगत धाराओं में मुकदमा कायम होना चाहिए था जो नहीं हुआ। इतना बड़ा आर्थिक नुकसान न्याय और मानवता के विरुद्ध इतना बड़ा तांडव किया गया है उसकी जितना निंदा की जाए वह कम है। इतना बड़ा आर्थिक नुकसान और विधि और न्याय मानवता के खिलाफ जितनी भी निंदा की जाए वह कम है। प्रदेश सरकार को जनता द्वारा चुनी हुई सरकारों को यह ताकत दी जाती है कि जनता ने चुना है वह उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री हैं ऐसा मुख्यमंत्री जो अपराधियों को दंड न दे सके जिस को साक्ष्य देने की हिम्मत ना हो ऐसा मुख्यमंत्री दो कौड़ी का है। पूरे प्रदेश में गरीब लोगों के साथ अनुसूचित जाति अनुसूचित जनजाति बालिकाओं महिलाओं के साथ इस तरह का व्यवहार अपराध की श्रेणी में आता है। उन्हें बचाने वाले भी गंभीर अपराध के दोषी हैं। उनके खिलाफ लोग धरने पर बैठे हैं। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री यहा आकर मौके पर देखें और यहां के कप्तान और जिलाधिकारी को दंडित करें एवं सेवा से बर्खास्त करें। ऐसे लोक सेवकों को कार्य करने की जरूरत नहीं है। इन पर लगाम लगाने का काम बहुजन परिवार करेगा। इस परिवार के पास आनाज न खाने की व्यवस्था है ना सोने की व्यवस्था तक भी नही है। जब पीड़ित परिवार से मिल रहे थे तो महिलाएं फूट फूट कर रो पड़ी और अपना दुखड़ा सुनाई जिससे वह भी बिफर पड़े। इस दौरान उनके साथ प्रतिनिधिमंडल में घनश्याम चंद खरवार पूर्व सांसद, संगीता आजाद सांसद, हरिश्चंद्र गौतम, विनोद, नीलम कुशवाहा, जिला अध्यक्ष अरविंद कुमार, मदन राम,रामवृक्ष गौतम, रमेश कुमार, अश्वनी कुमार आदि लोग मौजूद थे।
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