कोविड 19 के नियंत्रण एवं चिकित्सा में भारतीय चिकित्सा पद्धति यथा "आयुर्वेद" की महत्वपूर्ण भूमिका एवं देश के जनमानस में सकारात्मक परिणाम के परिपेक्ष्य में आईएमए का सवालिया निशान।
(मनोज चतुर्वेदी ब्यूरो प्रभारी आजमगढ़)
हर खबर पर नजर सच है तो दिखेगी।
आजमगढ़।
विश्व के प्राचीनतम चिकित्सा ज्ञान का द्योतक आयुर्वेद जिसके माध्यम से "स्वस्थस्य स्वास्थ्य रक्षणं आतुरस्य विकार प्रशमनं च" व जीवन में "सुखायु और दीर्घायु" प्रदान करने के लिए देश के जनमानस में गरीब ग्रामीण से लेकर साधन संपन्न शहरी उच्च पदस्थ शीर्षस्थ समुदाय विशेष तक उपयोगिता स्वयं सिद्ध है। वर्तमान समय में भी वैश्विक महामारी कोविड 19 के सुनामी को देश में नियंत्रित करने में भारतीय चिकित्सा पद्धति अर्थात आयुर्वेद की महत्वपूर्ण भूमिका रही है जो स्वयं प्रमाणित है, देश में परिलक्षित भी है, जिसके लिए प्रमाण की आवश्यकता नहीं है:-
*"स्वतः प्रमाणं परतः प्रमाणं।।*
आयुर्वेद के विषय में व्यक्तिगत अज्ञान आयुर्वेद के अवैज्ञानिक होने का प्रमाण नहीं हो सकता। देश के गौरवमयी चिकित्सा पद्धति आयुर्वेद को राष्ट्रीय आपदा उन्मूलन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने पर किसी संस्था द्वारा प्रमाण पत्र प्रदत्त करने की आवश्यकता नहीं है।
भारत के माननीय प्रधानमंत्री आदरणीय श्री नरेन्द्र मोदी जी के कुशल नेतृत्व में भारत सरकार के आयुष मंत्रालय ने देश के जनमानस के जीवनशैली के अनुकूल आहार, विहार, सदवृत एवं आयुष काढ़ा उपयोग करने के लिए उद्घोषित किया। जिससे जनमानस में रोग प्रतिरोधक क्षमता विकसित हो जीवनरक्षा प्रणाली के लिए अत्यंत उपयोगी रही। फलस्वरूप देश में कोविड 19 वैश्विक महामारी की भयावहता अल्पतम देखी गई। देश में संक्रमित रोगियों की संख्या विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा किए गए दावे से बहुत कम रही। साथ ही उसकी भयावहता भी किए गए दावे से बहुत ही कम रही। ये तत्थ सुस्पष्ट सिद्ध करते हैं कि आयुर्वेदिक औषधि द्रव्यों द्वारा जनमानस में रोग प्रतिरोधक क्षमता विकसित करने के लिए हमारे प्रयास फलीभूत हुए हैं।
देश के विभिन्न शोध संस्थाओं द्वारा जारी रिपोर्ट, भारतीय जनमानस सर्वे, विभिन्न मीडिया सर्वे रिपोर्ट, पत्र पत्रिकाओं में प्रकाशित लेख आलेखों द्वारा सर्व विदित है कि कोविड 19 महामारी नियंत्रण में भारतीय चिकित्सा पद्धति आयुर्वेद, योग का महत्वपूर्ण योगदान रहा है।
आयुर्वेद औषधि द्रव्यों के उपयोग से प्राप्त सुपरिणाम एवं सफलतम पुष्टि तथा सम्पूर्ण संतुष्टि के बाद केंद्रीय भारत सरकार के स्वास्थ्य मंत्रालय ने आयुर्वेद द्वारा कोविड 19 वैश्विक महामारी से ग्रस्त रुग्ण की चिकित्सा व्यवस्था प्रदत्त करने की संस्तुति प्रदान की एवं प्रोटोकॉल जारी किया, जो भारतीय जनमानस के स्वास्थ्य रक्षण एवं चिकित्सा व्यवस्था के अनुकूल सराहनीय एवं न्यायोचित कदम है। अतः हम अपने राष्ट्रीय संगठन के माध्यम से माननीय प्रधानमंत्री भारत सरकार श्री नरेन्द्र मोदी जी, माननीय स्वास्थ्य मंत्री भारत सरकार श्री हर्षवर्धन जी, माननीय आयुष मंत्री भारत सरकार श्री श्रीपद एशो नाइक जी को जनमानस जीवन रक्षण हेतु आयुर्वेद के प्रति सकारात्मक सहयोग एवं देश हित में न्यायोचित चिकित्सा व्यवस्था के प्रदत्त करने के प्रशंसनीय प्रयास की बारम्बार सराहना करते हुए आभार व्यक्त करते हैं।
देश में समस्त चिकित्सा पद्धतियों पर निष्फल एकाधिपत्य जगाने वाला एक चिकित्सा संगठन गलतफहमी का शिकार हो अकारण विद्वेष की भावना से अभिभूत देश के गौरवमयी चिकित्सा पद्धति आयुर्वेद को उत्थान और विकास से वंचित रखने की असफल कोशिश में प्रयासरत हैं। आयुर्वेद एक सम्पूर्ण चिकित्सा पद्धति है। केवल लाक्षणिक चिकित्सा और आपातकालीन सेवा नहीं है। आईएमए द्वारा आयुर्वेदिक औषधि को प्लेसबो अर्थात कूट भैषज्य कहना और भारत सरकार के स्वास्थ्य मंत्रालय द्वारा भारतीय चिकित्सा आयुर्वेद के साथ कोविड 19 वैश्विक महामारी के परिपेक्ष्य में प्रोटोकॉल जारी करने को अवैज्ञानिक, असंवैधानिक की संज्ञा देना निंदनीय ही नहीं मनबढ़ दृष्टिकोण को प्रतिबिंबित करता है, जिसे हमारा राष्ट्रीय संगठन कड़े शब्दों में भर्त्सना करता है।
*डॉ. डी. डी. सिंह*
*अध्यक्ष*
*नीमा आज़मगढ़*
*7985718547*
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